महामारी के दौरान हमारा स्वभाव Samir Deokuliar
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महामारी के दौरान हमारा स्वभाव
Samir Deokuliar
SESSIONS TIME
1. स्थिर रहो 24 MINS
2. सुरक्षित रहे 27 MINS
3. उदारता 27 MINS
4. दोष लगाना 26 MINS
5. अवसाद 31 MINS
6. कमज़ोरी और ताकत 26 MINS

Speaker:   Samir Deokuliar
Publisher:   Samir Deokuliar - 2020
 
Keywords:

महामारी ने सब को प्रभावित किया है और यह कठिन समय है | हम बहुत सी चुनौतियों का और कुछ अनसुलझे सवालों का सामना कर रहे हैं | इस समय में हम आसानी से अपनी शांति खो सकते हैं , हो सकता है की हम परेशान हो जाएँ या लोगों से कटने लगें | लेकिन परमेश्वर हमारी हर एक परिस्थिति का इस्तेमाल हमारे जीवन को बनाने और चुनौतियों की इस्तेमाल हमें परिपक्व करने के लिए करते हैं |

आज जब सब कुछ बदल रहा है तो हमारे पास ज़रूरत के समय में एक न बदलने वाला परमेश्वर है | समीर गहरायी से बताते हैं की कैसे हम अपने व्यक्तित्व को बना सकते हैं और कैसे हमारा जीवन दूसरों के लिए आशीष का कारण बन सकता है |

1.    स्थिर रहो

2.     सुरक्षित रहे

3.    उदारता

4.    दोष लगाना

5.    अवसाद

6.    कमज़ोरी और ताकत



 

Speaker:   Samir Deokuliar
Publisher:   Samir Deokuliar - 2020
 
Keywords:
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Samir Deokuliar

Grace, mercy, love, forgiveness—these are core tenets of the Christian faith. And yet, a journey through the Old Testament, especially through the ‘law books,’ or the Pentateuch, can have us wondering if we are talking about the same God of the New Testament!

To our modern-day thinking, the Old Testament laws seem harsh, unyielding and extreme—perhaps even fanatical. Did God really say that, we may wonder? Is it still relevant to us today? Which rules of the Old Testament should we follow?

In this six-part series, Samir Deokuliar helps us resolve this dilemma by reconciling the seemingly contradictory theologies of the Old and New Testament. 

SESSIONS TIME
Trailer 3 MINS
1. God Gave the Law 9 MINS
2. Jesus Fulfilled the Law 9 MINS
3. Understanding Grace 10 MINS
4. Handling Law Today 10 MINS
5. Living by Grace 10 MINS
6. Giving Grace 11 MINS
समीर देवकुलियार

अनुग्रह, दया, प्रेम, क्षमा- यह मसीही विश्वास के मूल सिद्धांत हैं। और फिर भी, यदि हम पुराने नियम के माध्यम से एक यात्रा करें, विशेष रूप से, ‘व्यवस्था की पुस्तकों’ या ‘पंचग्रंथ’ के माध्यम से, तो हम यह सोच सकते है कि क्या हम उसी परमेश्वर के बारे में बात कर रहे हैं जिन्हें हम नए नियम में देखते है!


हमारी आधुनिक सोच के अनुसार, पुराने नियम के कानून कठोर, अडिग और अतिवादी --शायद कट्टर भी लगते हैं। क्या परमेश्वर ने वास्तव में ऐसा कहा है, हम विस्मित होते हैं? क्या यह आज भी हमारे लिए प्रासंगिक है? पुराने नियम के किन नियमों का हमें पालन करना चाहिए?


इस छह-भाग की श्रृंखला में, समीर देवकुलियार पुराने और नए नियम के विरोधाभासी प्रतीत होने वाले सिद्धांतों की इस दुविधा को सुलझाने में हमें मदद करते हैं।

SESSIONS TIME
ट्रेलर 3 MINS
1. सत्र 1: परमेश्वर ने हमें ... 11 MINS
2. सत्र 2: यीशु ने व्यवस्था को ... 11 MINS
3. सत्र 3: अनुग्रह को समझना 12 MINS
4. सत्र 4: वर्तमान में व्यवस्था का ... 11 MINS
5. सत्र 5: अनुग्रह द्वारा जीवन ... 11 MINS
6. सत्र 6: अनुग्रह प्रदान करना 13 MINS

The Pandemic has hit everyone and it’s been hard. We are faced with huge challenges and some unanswered questions. At such a time it’s easy for us to lose our cool, feel frustrated and even tempted to cut corners. But the Lord uses every situation to build our lives and mature us through the challenges.

Today when everything around us is changing it’s the unchanging God who can help us in our time of need. Samir shares deep insights on how we can see our own character develop and how our lives can be a huge blessing for others. 

This series looks at the following

  1. Patience
  2. Being Secure
  3. Being Generous
  4. Judging Others
  5. Depression
  6. Weakness and Strength


SESSIONS TIME
1. Patience 21 MINS
2. Being Secure 21 MINS
3. Being Generous 27 MINS
4. Judging Others 23 MINS
5. Depression 29 MINS
6. Weakness and Strength 24 MINS
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